तिलकराम पटेल संपादक महासमुन्द छत्तीसगढ़ जनपर्ध न्यूज चैनल

ग्राम पंचायत डोंगरीपाली के आश्रित ग्राम कैलाशपुर में श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता के साथ संपन्न हुआ
पूर्णिमा का पावन कार्यक्रमकैलाशपुर (डोंगरीपाली)।ग्राम पंचायत डोंगरीपाली के आश्रित ग्राम कैलाशपुर में पूर्णिमा के पावन अवसर पर एक भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जो श्रद्धा, भक्ति, उत्साह और सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण बना। यह आयोजन ग्राम पंचायत डोंगरीपाली की सरपंच श्रीमती किरण दुलीकेसन साहु के कुशल नेतृत्व, धार्मिक आस्था और सामाजिक चेतना का सशक्त प्रतीक रहा। कार्यक्रम में ग्रामवासियों की भारी उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि आज भी ग्रामीण जीवन में धार्मिक परंपराएँ सामाजिक एकता की मजबूत कड़ी हैं।पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्वभारतीय सनातन संस्कृति में पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह तिथि मन, आत्मा और समाज को शुद्ध करने का संदेश देती है। मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन किए गए धार्मिक कार्यों से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी भाव के साथ कैलाशपुर में इस पावन दिवस को भव्य रूप से मनाया गया।सरपंच श्रीमती किरण दुलीकेसन साहु ने इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया कि धार्मिक आयोजनों से न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि सामाजिक एकजुटता भी मजबूत होती है।कार्यक्रम का शुभारंभ – दीप प्रज्वलन से हुआ वातावरण भक्तिमयकार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। दीप जलते ही पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। चारों ओर “जय श्रीराम”, “हर हर महादेव” और भक्ति गीतों की मधुर ध्वनि गूंजने लगी। ग्रामवासियों ने इस क्षण को अत्यंत श्रद्धा के साथ आत्मसात किया।दीप प्रज्वलन के दौरान सरपंच श्रीमती किरण दुलीकेसन साहु ने ग्राम की सुख-समृद्धि, शांति और विकास की कामना की।पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठानकार्यक्रम के दौरान विधिवत पूजा-अर्चना, हवन, आरती और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। ग्रामीणों ने भगवान की आराधना कर अपने परिवार, गांव और समाज के लिए मंगलकामनाएँ कीं।पूजा के दौरान पंडितजनों द्वारा मंत्रोच्चारण किया गया, जिससे वातावरण अत्यंत पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भर गया।विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की सहभागिता ने आयोजन को और भी गरिमामय बना दिया।भजन-कीर्तन से गूंजा कैलाशपुरपूजा-अर्चना के पश्चात भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। स्थानीय भजन मंडलियों द्वारा प्रस्तुत भक्ति गीतों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।भजनों के माध्यम से प्रेम, करुणा, सेवा और सत्य का संदेश दिया गया। ग्रामीण देर तक भक्ति रस में डूबे रहे।भजन-कीर्तन के दौरान यह स्पष्ट देखने को मिला कि धर्म केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने की शक्ति भी है।ग्रामीणों की ऐतिहासिक सहभागिताइस आयोजन में कैलाशपुर सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया।ग्रामीणों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर व्यवस्थाओं में सहयोग किया, जिससे आयोजन पूर्णतः अनुशासित और सफल रहा।महिला नेतृत्व का सशक्त उदाहरण – श्रीमती किरण दुलीकेसन साहुइस कार्यक्रम में सरपंच श्रीमती किरण दुलीकेसन साहु की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही। उन्होंने न केवल आयोजन की संपूर्ण जिम्मेदारी निभाई, बल्कि ग्रामवासियों को जोड़कर इसे एक सामाजिक उत्सव का स्वरूप दिया।उनका कहना था कि“धार्मिक कार्यक्रम हमें हमारी संस्कृति से जोड़ते हैं और समाज में प्रेम, सहयोग और भाईचारे को बढ़ावा देते हैं। ग्राम पंचायत का दायित्व केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों को संरक्षित करना भी है।”सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेशयह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि सामाजिक एकता, सहयोग और भाईचारे का जीवंत उदाहरण भी बना। कार्यक्रम में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं देखा गया। सभी ने मिल-जुलकर आयोजन को सफल बनाया।ग्रामवासियों ने एक स्वर में कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं और आने वाली पीढ़ियों को संस्कार प्रदान करते हैं।प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापनकार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। प्रसाद ग्रहण करते समय ग्रामीणों के चेहरे पर संतोष और खुशी स्पष्ट झलक रही थी।प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ, लेकिन भक्तों के मन में इसकी स्मृतियाँ लंबे समय तक जीवित रहेंगी।ग्रामीणों की प्रतिक्रियाग्रामीणों ने इस आयोजन के लिए सरपंच श्रीमती किरण दुलीकेसन साहु का आभार व्यक्त किया। उनका कहना था कि“ऐसे कार्यक्रमों से गांव में सकारात्मक वातावरण बनता है और आपसी संबंध मजबूत होते हैं।”कई ग्रामीणों ने भविष्य में भी इस तरह के धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करने की इच्छा जताई।संस्कृति और परंपरा का संरक्षणआज के आधुनिक युग में जब लोग अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे में कैलाशपुर में आयोजित यह पूर्णिमा कार्यक्रम भारतीय संस्कृति और परंपरा के संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय प्रयास साबित हुआ।यह आयोजन यह संदेश देता है कि विकास के साथ-साथ संस्कार और संस्कृति का संरक्षण भी आवश्यक है।निष्कर्षग्राम पंचायत डोंगरीपाली के आश्रित ग्राम कैलाशपुर में आयोजित पूर्णिमा का पावन कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति, सामाजिक एकता और महिला नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण रहा। सरपंच श्रीमती किरण दुलीकेसन साहु के नेतृत्व में संपन्न यह आयोजन आने वाले समय में अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा।यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि ग्रामवासियों के बीच एकता, सहयोग और भाईचारे के मजबूत सूत्र को और अधिक सुदृढ़ करने में सफल रहा।


