

10 दिनों में चार बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, अब ईंधन की किल्लत ने बढ़ाई किसानों की चिंत

बसना। (बसन्त साहू की रिपोर्ट)
क्षेत्र में डीजल की किल्लत अब किसानों के लिए गंभीर संकट का रूप लेती जा रही है। एक ओर पिछले 10 दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार बार हुई बढ़ोतरी ने किसानों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है, वहीं दूसरी ओर समय पर डीजल नहीं मिलने से खेती-किसानी के कार्य प्रभावित होने लगे हैं। खरीफ सीजन की तैयारी और रबी फसल के अंतिम चरण के कृषि कार्यों के बीच डीजल की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।बसना नगर सहित गढ़फुलझर, आमापाली, सोनमुंडी, परसकोल, बरोली, केंवटापाली तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के किसान इन दिनों डीजल के लिए पेट्रोल पंपों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। कई किसानों को सुबह से ही पेट्रोल पंपों पर लाइन लगानी पड़ रही है, फिर भी पर्याप्त मात्रा में डीजल नहीं मिल पा रहा है। बसना नगर स्थित दानी पेट्रोल पंप और गढ़फुलझर क्षेत्र के पेट्रोल पंपों में डीजल लेने के लिए किसानों की लंबी कतारें देखी गईं। कई किसान ट्रैक्टर और डीजल टैंकों के साथ घंटों इंतजार करते नजर आए।किसानों का कहना है कि खेती का अधिकांश कार्य डीजल आधारित मशीनों पर निर्भर है। खेतों की जुताई, बुवाई की तैयारी, धान की कटाई, मिंजाई तथा सिंचाई के लिए ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और पंपसेट का उपयोग किया जाता है। ऐसे समय में डीजल की कमी कृषि कार्यों की गति को प्रभावित कर रही है। समय पर खेत तैयार नहीं होने और सिंचाई कार्य बाधित होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाने की आशंका सता रही है।ग्रामीण किसानों ने बताया कि पहले ही उर्वरक, बीज, कीटनाशक और कृषि उपकरणों की बढ़ती कीमतों से खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। अब डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और उपलब्धता की समस्या ने खेती को और अधिक महंगा बना दिया है। कई किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही डीजल आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो आगामी खरीफ सीजन की तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं।पेट्रोल पंप संचालकों के अनुसार डीजल की आपूर्ति पहले की तुलना में कम मात्रा में हो रही है, जिसके कारण मांग और उपलब्धता के बीच असंतुलन की स्थिति बन गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्यों के चलते डीजल की मांग अचानक बढ़ गई है, जबकि आपूर्ति उसी अनुपात में नहीं हो पा रही है। यही कारण है कि पंपों पर सुबह से ही भीड़ लग रही है और कई बार निर्धारित मात्रा में ही डीजल वितरण करना पड़ रहा है।किसानों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे युद्ध, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का सीधा असर अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है।

बढ़ती महंगाई और ईंधन संकट का सबसे अधिक असर खेती-किसानी पर पड़ रहा है, क्योंकि कृषि क्षेत्र आज भी बड़े पैमाने पर डीजल पर निर्भर है।क्षेत्र के किसानों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि पेट्रोल पंपों पर डीजल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाया जाए। किसानों का कहना है कि कृषि कार्यों के इस महत्वपूर्ण समय में यदि डीजल संकट का समाधान नहीं हुआ तो खेती की उत्पादकता प्रभावित होने के साथ-साथ किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।ग्रामीण अंचल में बढ़ती डीजल किल्लत को लेकर किसानों में चिंता और नाराजगी दोनों देखने को मिल रही है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और तेल कंपनियों पर टिकी हैं कि वे इस समस्या का जल्द समाधान निकालकर किसानों को राहत प्रदान करें।


