
बसना।

शिक्षा जगत में अपने उत्कृष्ट योगदान, सरल व्यक्तित्व एवं अनुशासित कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ शिक्षक श्री छबीलाल बाघ के सेवानिवृत्ति अवसर पर भावपूर्ण सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर शिक्षकों एवं विद्यालय परिवार द्वारा उन्हें मानपत्र भेंट कर उनके 37 वर्षों के गौरवमयी सेवाकाल को याद किया गया।मानपत्र में उल्लेखित जानकारी के अनुसार श्री छबीलाल बाघ का जन्म 27 सितंबर 1963 को ग्राम खोरापाली में हुआ। प्रारंभ से ही वे प्रतिभाशाली, अनुशासित और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहे।

उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव में पूर्ण करने के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त कर शिक्षकीय जीवन की शुरुआत की और निरंतर शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करते रहे।उन्होंने अपने लंबे शिक्षकीय जीवन में विकासखंड एवं जिला महासमुंद के विभिन्न विद्यालयों में सेवाएं दीं। जहां-जहां उन्होंने कार्य किया, वहां विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी प्रदान की। सहकर्मियों के अनुसार श्री बाघ न केवल एक कुशल शिक्षक रहे, बल्कि विद्यार्थियों के मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी बने रहे।मानपत्र में उनके सौम्य व्यवहार, सहयोगी भावना एवं विद्यालय के विकास में दिए गए योगदान का विशेष उल्लेख किया गया। विद्यालय परिवार ने कहा कि श्री बाघ ने सदैव शिक्षा को समाज निर्माण का माध्यम माना और अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ किया।

सेवानिवृत्ति समारोह के दौरान शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों ने उन्हें शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने उनके स्वस्थ, सुखमय एवं दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणादायी रहेगा।समारोह भावुक वातावरण में संपन्न हुआ, जहां अनेक लोगों की आंखें नम नजर आईं। विद्यालय परिवार ने कहा कि श्री छबीलाल बाघ काj योगदान शिक्षा जगत में सदैव अविस्मरणीय रहेगा।


