
गहरीकरण के बाद भी नहीं भरा गया तालाब, बोरवेल का पानी नालियों में बह रहा; ग्रामीणों ने कलेक्टर से जांच और कार्रवाई की मांग उठाई


बसना (महासमुंद)।
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत अरेकेल में विकास कार्यों में भारी लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां लगभग 8.50 लाख रुपये की लागत से तालाब का गहरीकरण तो किया गया, लेकिन उसमें पानी भरने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। दूसरी ओर, गांव में लगे बोरवेल का पानी रोजाना हजारों लीटर नालियों और खेतों में बहकर व्यर्थ जा रहा है।
जमीनी हकीकत
ग्रामीणों के अनुसार, गर्मी के मौसम में जलसंकट से राहत दिलाने के उद्देश्य से तालाब का गहरीकरण कराया गया था। लेकिन पंचायत द्वारा न तो तालाब में पानी भरवाया गया और न ही बोरवेल से निकल रहे पानी का सही उपयोग किया गया।पाइपलाइन कई जगह से टूटी हुई हैनिगरानी के अभाव में पानी लगातार बह रहा हैतालाब आज भी पूरी तरह सूखा पड़ा हैइस स्थिति के कारण ग्रामीणों और पशुओं को पानी के लिए दूर-दराज जाना पड़ रहा है।

ग्रामीणों में आक्रोश
गांव के लोगों में पंचायत के प्रति गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है:“तालाब गहरा तो कर दिया, लेकिन उसमें पानी नहीं डाला गया। बोरवेल चल रहा है, फिर भी पानी बर्बाद हो रहा है। हम पानी के लिए परेशान हैं।”महिलाओं ने भी नाराजगी जताते हुए बताया कि:नल-जल योजना ठप पड़ी है कई जगह पाइप फटे हुए हैं शिकायत के बावजूद मरम्मत नहीं कराई जाती है।
प्रशासन से मांग
अरेकेल के ग्रामीणों ने कलेक्टर महासमुंद और CEO जनपद पंचायत बसना से मांग की है कि:बोरवेल का पानी तुरंत तालाब में डलवाया जाएपाइपलाइन लीकेज बंद कर पानी की बर्बादी रोकी जाएदोषी पंचायत प्रतिनिधियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
पंचायत का पक्ष
इस मामले में पंचायत सचिव से संपर्क करने पर उन्होंने “सरपंच से चर्चा कर जानकारी देने” की बात कही थी, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया गया। इससे सरपंच और सचिव दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
निष्कर्ष
सरकार जहां जल संरक्षण और हर घर जल जैसी योजनाओं पर जोर दे रही है, वहीं अरेकेल पंचायत की यह लापरवाही न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन पर भी सीधा असर डाल रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक कार्रवाई करता है।




