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9 वर्षों से न्याय की आस: बसना थाना में दिए आवेदन पर कार्रवाई नहीं, हेमलाल नायक दर-दर भटकने को मजबूर
बसना/ महासमुंद
बसना ब्लॉक अंतर्गत ग्राम रसोड़ा निवासी हेमलाल नायक पिछले लगभग नौ वर्षों से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें राहत नहीं मिल सकी है। वर्ष 2017 में बसना थाना में दिए गए आवेदन पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से वे और उनका परिवार मानसिक, सामाजिक और आर्थिक संकट से जूझ रहा है।
लेन-देन विवाद से शुरू हुआ मामला
पीड़ित के अनुसार, वर्ष 2017 में गांव के ही जगदीश साहू (आयकर सलाहकार) के साथ उनका लेन-देन था। आरोप है कि इसी दौरान उन्हें डरा-धमकाकर एक ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर करवा लिए गए। इस संबंध में उन्होंने तत्काल थाना बसना में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस द्वारा प्रभावी जांच नहीं की गई।


चेक में राशि भरकर कोर्ट में केस
हेमलाल नायक का आरोप है कि बाद में उक्त ब्लैंक चेक में 4.50 लाख रुपये भरकर महासमुंद के ट्रायल कोर्ट में मामला दायर किया गया। इससे परेशान होकर उन्होंने सत्र न्यायालय में रिवीजन याचिका लगाई।
केस डायरी नहीं, वारंट जारी
पीड़ित का कहना है कि सत्र न्यायालय द्वारा बसना थाना से केस डायरी मांगी गई, लेकिन थाना द्वारा प्रस्तुत नहीं की गई। इसके चलते ट्रायल कोर्ट में उन्हें फरार बताते हुए वारंट जारी कर दिया गया, जबकि वे गांव में ही रह रहे थे।
आधी रात गिरफ्तारी, कोर्ट से बरी
20 नवंबर 2019 की रात करीब 3 बजे पुलिस ने उनके घर पहुंचकर उन्हें गिरफ्तार किया। उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां ट्रायल कोर्ट ने उसी दिन उन्हें बरी कर दिया।
बरी के बाद भी थाने में रखने का आरोप
हेमलाल नायक ने आरोप लगाया कि बरी होने के बावजूद उन्हें दो रात और तीन दिन तक थाना बसना में बैठाए रखा गया। इस दौरान मीडिया में खबरें आने से उनकी सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचा।


पैथोलॉजी लैब बंद, आर्थिक संकट
पीड़ित का कहना है कि न्याय के लिए लगातार आवेदन देने के बाद उनका पैथोलॉजी लैब भी बंद करवा दिया गया, जो परिवार की आय का मुख्य स्रोत था। इसके बाद से उनकी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो गई है।
सांठगांठ की आशंका, एफआईआर की मांग
हेमलाल नायक ने पुलिस और आरोपितों के बीच सांठगांठ की आशंका जताई है। उनका कहना है कि संज्ञेय अपराध होने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उन्होंने शासन-प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर तत्काल एफआईआर दर्ज करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।अब देखना यह होगा कि 9 वर्षों से न्याय की राह देख रहे पीड़ित को आखिर कब न्याय मिल पाता है और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।




