
हजारों महिलाओं ने पदयात्रा में लिया हिस्सा, नारी शक्ति वंदन अधिनियम को दिया जोरदार समर्थन


सरायपाली।नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में सरायपाली में आयोजित नारी शक्ति वंदन पदयात्रा में हजारों महिलाओं की अभूतपूर्व भागीदारी देखने को मिली। इस भव्य पदयात्रा की अगुवाई महासमुंद सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी ने की, वहीं छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा ने भी शामिल होकर महिलाओं का उत्साहवर्धन किया।पूर्वान्ह से ही क्षेत्र के विभिन्न गांवों, कस्बों एवं वार्डों से महिलाएं सरायपाली पहुंचने लगी थीं। पदयात्रा नई मंडी परिसर से प्रारंभ होकर झिलमिला, गौरव पथ, जय स्तंभ चौक, थाना चौक और बस स्टैंड होते हुए जनपद परिसर तक पहुंची। पूरे मार्ग में नागरिकों द्वारा पुष्पवर्षा कर एवं शीतल पेयजल-शरबत पिलाकर पदयात्रियों का भव्य स्वागत किया गया।इस दौरान लगभग 4000 से अधिक महिलाओं ने हाथों में तख्तियां, बैनर और जागरूकता संदेश लेकर पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। “नारी शक्ति का सम्मान, देश का अभिमान” जैसे नारों से पूरा शहर गूंज उठा।सभा को संबोधित करते हुए सांसद रूपकुमारी चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के माध्यम से लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा, जिससे उन्हें निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी का अवसर प्राप्त होगा।उन्होंने आगे कहा कि यह अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान, अधिकार और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की ऐतिहासिक पहल है। आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं, ऐसे में राजनीति में भी उनकी समान भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है।कार्यक्रम में बसना विधायक डॉ. संपत अग्रवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष येतराम साहू, जिला महामंत्री जितेंद्र त्रिपाठी एवं थानसिंग दीवान, जिला उपाध्यक्ष विपिन उपोवेजा, वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश चौधरी, पूर्व विधायक रामलाल चौहान, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष श्रीमती स्मिता चंद्राकर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मोंगरा पटेल, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती पटेल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, महिला पदाधिकारी एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।इस विशाल आयोजन की सफलता में क्षेत्र के महिला संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने गांव-गांव और घर-घर जाकर महिलाओं को इस पदयात्रा से जोड़ने का कार्य किया।



