छत्तीसगढ़ जनपर्ध न्यूज

प्रधान संपादक
कड़ी मेहनत, लगन, परिश्रम और जुनून से व्यक्ति कुछ भी कर सकता है। इसके प्रत्यक्ष उदाहरण नगर पंचायत टुंडरा में के श्री सुरेन्द्र पटेल जी है। बचपन से ही उनका सपना कड़ी मेहनत, लगन और परिश्रम से भाग्य को बदलना था और आज उनकी मेहनत रंग लाई है।उन्होंने प्रतिकूलताओं के बीच परिश्रम एवं पुरुषार्थ से अपने जीवन का निर्माण किया है। मनुष्य परिस्थितियों का दास नहीं, उनका निर्माता, नियंत्रणकर्ता और स्वामी है को चरित्रार्थ किया है।भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के राज्य स्तरीय गोल्ड मेडलिस्ट से लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा नेट JRF की परीक्षा उत्तीर्ण कर पतंजलि विश्वविद्यालय से योग साधना का वैज्ञानिक और व्यावहारिक स्वरूप पर उन्होंने योग ऋषि परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज तथा आचार्य बालकृष्ट जी के संरक्षण में संस्कृत के महान आचार्य पतंजलि विश्वविद्यालय के पूर्व प्रति कुलपति प्रोफेसर महावीर अग्रवाल जी के मार्गदर्शन में अपना शोध कार्य पूर्ण किया है। यह शोध कार्य समग्र स्वास्थ्य शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य तथा अखंड आनंद प्रदान करने वाली साधना पद्धति का व्यावहारिक और वैज्ञानिक शोध कार्य है। यह शोध कार्य प्रत्येक आयु वर्ग के लिए सार्थक और प्रभावी कार्य है। यह उपाधि उन्हें महामहिम राष्ट्रपति जी की प्रत्यक्ष उपस्थिति में 2 नवंबर 2025 को पतंजलि विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समाज में प्रदान किया गया।इसी क्रम में 28 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ प्रदेश हरदीहा मरार पटेल समाज कर्मचारी प्रकोष्ठ ने हजारों की उपस्थिति में श्री सुरेन्द्र जी को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सभी सामाजिक बंधुओं के बीच समाज गौरव सम्मान देकर सम्मानित किया।डॉ सुरेन्द्र जी की यह उपलब्धि समाज के लिए गौरव का विषय है। वर्तमान में श्री सुरेन्द्र जी स्वस्थ शरीर, स्वच्छ मन और सभ्य समाज की रचना को लेकर कार्य कर रहे है। इसी उद्देश्य से उन्होंने आभासी रूप से पवित्रा योग एंड वेलनेस की भी स्थापना की है। जिसके माध्यम से वे स्वस्थ शरीर और श्रेष्ठ समाज की रचना के लिए कार्य कर रहे है।उनकी यात्रा में उनके नाना जी श्री मुनीराम पटेल जी की विशेष भूमिका है। वे आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती जी के महान ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश से प्रभावित थे, इसलिए उन्होंने सदैव योग और अध्यात्म के लिए श्री सुरेन्द्र जी को प्रेरित किया आगे बढ़ाया। श्री सुरेन्द्र की ने अपनी इस लंबी यात्रा से जुड़े सभी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े आत्मीय परिजनों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित किया है।


