

*संस्कार द राइजिंग स्कूल परसकोल में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया दादा-दादी दिवस

बसना। (रिपोर्टर बसन्त साहू)
संस्कार द राइजिंग स्कूल, परसकोल (बसना) में दादा-दादी दिवस अत्यंत हर्षोल्लास, उत्साह और पारिवारिक भावनाओं के साथ मनाया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम ने न केवल विद्यार्थियों को अपने बुजुर्गों के प्रति सम्मान और प्रेम का संदेश दिया, बल्कि दादा-दादी एवं नाना-नानी के साथ भावनात्मक जुड़ाव को भी सशक्त किया।कार्यक्रम का आयोजन विद्यालय की संचालिका श्रीमती अलिशा अग्रवाल के मार्गदर्शन एवं दिशा-निर्देश में किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के संचालकगण श्री ओमप्रकाश अग्रवाल, श्रीमती किरण अग्रवाल, श्रीमती शीला अग्रवाल, श्री मुकेश अग्रवाल, श्रीमती मेघा अग्रवाल, श्री विकास वाधवा एवं श्री भावेश अग्रवाल की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम का सफल संचालन विद्यालय के प्राचार्य श्री संजय तिवारी के कुशल नेतृत्व में किया गया।कार्यक्रम की शुरुआत प्रबंधन समिति द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना कर एवं आकाश में रंग-बिरंगे गुब्बारे छोड़कर की गई, जिससे पूरे वातावरण में उल्लास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। इसके पश्चात विद्यालय के विद्यार्थियों ने अपने दादा-दादी एवं नाना-नानी के सम्मान में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। बच्चों द्वारा प्रस्तुत गीत, नृत्य एवं नाट्य प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में दादा-दादी एवं नाना-नानी की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे बच्चों का उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ा। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठजनों को अपने विचार व्यक्त करने एवं जीवन के अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान किया गया। उन्होंने बच्चों को संस्कार, अनुशासन और पारिवारिक मूल्यों का महत्व समझाते हुए प्रेरणादायक बातें साझा कीं।कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण दादा-दादियों के लिए आयोजित “म्यूजिकल पेपर” खेल रहा, जिसमें उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस मनोरंजक गतिविधि ने उन्हें अपने बचपन की यादों में ले जाकर कार्यक्रम को और भी जीवंत बना दिया। उनके चेहरे की खुशी और उत्साह ने पूरे माहौल को भावुक और आनंदमय बना दिया।समापन अवसर पर विद्यालय प्रबंधन द्वारा सभी अतिथियों एवं अभिभावकों का आभार व्यक्त किया गया। इस सफल आयोजन ने यह संदेश दिया कि बुजुर्गों का सम्मान और उनके साथ समय बिताना बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षक शिक्षिकाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


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